Thursday, October 22nd, 2026

बिना सूचना के स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों में टीकाकरण की सुविधा को बंद किया

रायपुर
राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के निजी अस्पतालों में कार्यररत डॉक्टर और हेल्थ केयर वर्कर सहित कोरोना वारियर्स के नि:शुल्क टीकाकरण की सुविधा को एकाएक बंद किये जाने से डॉक्टरों में काफी रोष है। इस सुविधा के बंद किए जाने से डॉक्टरों सहित अस्पताल में कार्यररत सभी लोगों को सरकारी अस्पताल में वैक्सनी के दूसरे डोज के लिये लाईन में खड़े होना पड़ रहा है जिससे अस्पताल का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है।

आइएम के अध्यक्ष डॉक्टर विकास अग्रवाल व सचिव डॉक्टर आशा लता जैन ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उठाये गये इस एक तरफा निर्णय की इंडियन मेडिकल एसोसिएशनकड़ी निंदा करता है और सरकार के कदम से सभी डाक्टर आहत हैं। बिना किसी जानकारी और बिना वजह से स्वास्थ्य विभाग के द्वारा निजी अस्पतालों को दह गई इस सुविधा के बंद किये जाने से डाक्टरों हेल्थ वर्करों सहित कोरोना वारविर्यस को परेशानी हो रही है। अब सभी डॉक्टर्स व हेल्थ केयर वर्कर्स को सरकारी अस्पतालों में जा कर घंटों लाइन लगाकर यह टीका लगाना पड़ रहा है, जिससे निजी अस्पतालों और डॉक्टर की क्लीनिक का कामकाज प्रभावित हो रहा है .स्वास्थ्य विभाग के बिना किसी पूर्व सूचना के एकतरफा निर्णय की वजह से डॉक्टर्स व हेल्थ केयर वर्कर्स मैं दूसरा डोज लेने वालों की संख्या में भारी कमी हो सकती है अथवा उन्हें प्राइवेट अस्पताल में सशुल्क टीकाकरण करवाना पड़ेगा , जो कि केंद्र सरकार की घोषणा के विपरीत है। केवल छत्तीसगढ़ राज्य के ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिना सूचना टीकाकरण की सुविधा वापस लेना डॉक्टर्स और कोरोन वारिर्यस के प्रति सम्मान की भावना की सच्चाई को दिखाता है।

डॉ विकास अग्रवाल ने कहा कि यदि यह निर्णय उच्च स्तर पर लिया गया है तो इस निर्णय की कोई अधिकृत जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी देने को तैयार नहीं है। कोरोना संक्रमण काल में सराहनीय सामंजस्य और सहयोग से काम करने वाले निजी अस्पतालों के डॉक्टर , हेल्थ केयर वर्कर्स में इस निर्णय से निराशा की भावना देखी जा रही है। इस प्रकार के एकतरफा निर्णय पूर्व में भी विभाग द्वारा लिये जाते रहे हैं और सरकारी और निजी क्षेत्र में भेदभाव किया जाता है।

डॉ विकास ने कहा कि कोरोना काल में निजी क्षेत्र ने हर कदम पर आगे बढ़कर काम किया है लेकिन सरकारी सोच बदलती नहीं दिखाई देती। राज्य के बाहर की लैब को यहाँ से सैंपल ले जाकर जाँच करने की छूट है लेकिन उसी जाँच के स्थानीय निजी क्षेत्र के लोगों के द्वारा करने पर प्रतिबंध है. इसके पीछे की असल वजह क्या है समझ से परे है।

 

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Source : Agency

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